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समकालीन मीडिया और उसकी अप्रासंगिक प्राथमिकताएं!

जीवन की आपाधापी में एक मीडिया ही है जो हमें समाज और समूचे विश्व से जोड़े रखने का काम करता है। आज के समय में इस मीडिया रूपी वृक्ष पर विभिन्न प्रकार की शाखाएँ भी लग चुकी हैं, जैसे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सबसे नवीन सोशल मीडिया।प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से तो हम सब भली भांति परिचित हैं, परन्तु यह जो सोशल मीडिया है हमें इसे और अच्छे से समझने की आवश्यकता है।

क्योंकि यह स्वयं में काफी गतिशील है।इसका लाभ दोनों प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भरपूर तरह से उठा रहे हैं और आज के समय में दोनों का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ लोकप्रियता हासिल करना हो गया है न जनमानस तक उनके जीवन से जुड़ी आवश्यक सूचनाएं और समाचार दिखाना।

मीडिया चैनलों और अखबारों में मानो एक होड़ सी लगी है, ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों  (दर्शक/पाठक) को अपनी दुकान के साथ जोड़ा जाए और यह हासिल करने के लिए मीडिया किसी भी सीमा को पार करने के लिए तैयार है। ताज़ा उदाहरण लीजिए सोशल मीडिया पर श्रीमान संजय श्रीवास्तव (उर्फ़ डब्बू अंकल) जो एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं, उनके किसी विवाह समारोह में किया डांस समूचे सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर छाया हुआ है। बड़े-बड़े मीडियासंस्थानों का संजीव जी के घर जाना, उनका इंटरव्यू लेना और उसे जोर-शोर से अपने चैनल पर चलाना, यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है मीडिया की प्राथमिकता पर।

मनोरंजन, हसीं-मज़ाक सब महत्वपूर्ण है। परन्तु जब उसी समय देश में लोग अलग-अलग समस्याओं से जूझ रहे हों, चाहे वह हाल ही में आया आंधी-तूफ़ान और उससे कारण हुई मौतें हों या बढ़ते पेट्रोल और डीज़ल के दाम।अब ऐसे समय में डब्बू अंकल का डांस दिखाना ज़रूरी है या लोगों को ज़रूरी सूचनाओं से अवगत करना अधिक आवश्यक है, ये बातें गौर करने वाली हैं। हमारा मीडिया इस बुनियादी जीवन संकट के बारे में उदासीन होता दिख रहा है।

क्या सचमुच में मीडिया के लिए मानव जीवन की समस्याओं को उजागर करने और सभ्यता के अस्तित्व से कहीं अधिक महत्वपूर्ण किसी का नाचना हो सकता है। हमें संजीव जी से कोई शिकायत नहीं क्योंकि वे अपनी कला को कहीं न कहीं प्रस्तुत करेंगे ही और इसमें कुछ ग़लत नहीं है। गलती उन मीडिया संस्थानों की है जो उनकी वीडियो से सस्ती लोकप्रियता पाना चाहते हैं।

इस उदासीनता की वजह क्या है या कहें कौन है तो इसका जवाब कोई ज्यादा मुश्किल नहीं, इसका जवाब ‘हम’ ही हैं। क्योंकि यह सब हमें क्षणिक सुख देते हैं। जाने अनजाने हम भी इस तरह की खबरों को अपनी सहमती देते हैं, इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करके। तो सोचना हमें है कि हमें क्या चाहिए,‘आँख मारने वाली प्रिया प्रकाश / डब्बू अंकल का डांस’ या सच्ची पत्रकारिता जो देश के हर नागरिक की समस्याओं को उजागर करे। यदि आपका जवाब दूसरा है तो इसे ठीक करने की शक्ति भी आप ही के हाथ में है।ऐसी खबरों का बहिष्कार करें और इसे चलाने वाले मीडिया संस्थानों को सबक सिखाएं।

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